Key Resource Centre
भारत में ग्रामीण जल क्षेत्र में परिवर्तन आने और ग्यारहवीं योजना में क्षेत्र के लिए नए दृष्टिकोण से क्षेत्र नई क्षमताओं, दक्षता और इसमें कार्य करने वालों की उन्मुखता की जरूरत होती है। राष्ट्री्य ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) का लक्ष्य सभी स्तरों पर पणधारकों को जल आपूर्ति और जल संसाधनों की योजना, कार्यान्वीयन, प्रचालन, रखरखाव और प्रबंधन का अधिकार, जागरुकता लाना तथा दक्षता, प्रदान करना है। एनआरडीडब्ल्यूपी में ग्रामीण जल आपूर्ति क्षेत्र में कुशल और प्रशिक्षित कार्मिकों को पर्याप्ता रूप से प्रेरित करने के लिए बहुस्तरीय संवर्ग उपलब्ध् कराने की परिकल्पना की गई है ताकि निम्न लिखित सुनिश्चित हो सके।:
- जल आपूर्ति और जल स्रोतों का स्थायित्व।
- क्षेत्रीय निवेश का अधिकतम उत्पादक उपयोग करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों को बढ़ा हुआ लाभ प्रदान करना।
मुख्य संसाधन केन्द्र का उद्देश्यन यह सुनिश्चित करना है कि क्षेत्रीय व्यावसायिक विशेषज्ञों/विशिष्ट। लोग आवश्यंकता आधारित सेवाकालीन प्रशिक्षण/ज्ञान आधारित उपयोगी सेवाओं के जरिए भूमिका उत्तरदायित्वि और व्यावहार के प्रति संवेदनशील हों। केआरसी क्षेत्र व्यावसायिकों में नेतृत्व , प्रबंधकीय, प्रशासनिक, तकनीकी, व्यावहारिक और कानूनी पहलुओं की चुनौतियों को पूरा करने के लिए विशिष्टक प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के जरिए जानकारी और क्षमता की कमी को पूरा करेगा। यह भी अपेक्षा है कि राष्ट्रीय मुख्य संसाधन केन्द्र ग्रामीण जल आपूर्ति क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए क्षेत्रीय,संगठनात्मक और व्यक्तिगत लक्ष्यों में सामंजस्य् पैदा करने में मदद करेगा। राष्ट्रीय संसाधन केन्द्र निम्नलिखित के लिए जिम्मेदार होगा:
- पीएचईडी इंजीनियरों, जिला अधिकारियों, सीसीडीयू स्टॉफ, पंचायत सदस्यों , संबंधित विभाग के कार्यकर्ताओं, प्रेरकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, धार्मिक नेताओं, मीडिया एजेंसियों, क्षेत्रीय व्यावसायिकों, एनजीओ, स्व-रोजगार मकेनिकों, राजगीरों, स्कूल अध्या्पकों तथा छात्रों आदि के लिए प्रशिक्षण, अभिमुखीकरण और क्षमता विकास कार्यक्रम का आयोजन करना।
- राज्य की संचार और क्षमता विकास इकाइयों (सीसीडीयू) को तकनीकी मार्गदर्शन देना तथा अपनी सूचना, शिक्षा एवं संचार कार्यनीति और विभिन्न शेयरधारकों के क्षमता निर्माण का विकास करने के लिए राज्य /जिला विशिष्ट प्रशिक्षण मॉड्यूलों के विकास में सहायता करना।
- क्षेत्रीय दौरों के जरिए कार्यक्रम सुपुर्द को तीव्र करना/सुधार करने के लिए कार्यकलाप कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन करना, समस्याओं का पता लगाना तथा सुधार कार्रवाई का प्रस्ता्व करना।
- सफलता की कहानियों, उत्कृष्ट् पद्धतियों और विभिन्न मुद्दों का प्रलेखन करना।
- पीएचईडी इंजीनियरों, जिला अधिकारियों, पंचायत सदस्यों, वीडब्ल्यूएससी, पानी समिति कार्यकर्ताओं, प्रेरकों, स्कूल अध्यापकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, छात्रों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सहायता संगठनों आदि की क्षमता का निर्माण करने के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल/नियमावली का विकास करना।
संबंधित दस्तावेज/लिंक






